वो पल मानो बीत गए
महके-महके एहसासों में यौवन की तरुणाई में,
प्यार जहां सच्चा होता था वो पल मानो बीत गए।
सिंदूरी शामों के सपने रातों की तन्हाई में,
हर पल प्यार पगा होता था वो पल मानो बीत गए।
रिमझिम की झंकारों में सावन की फुहारों में,
हर पल जहां संगम होता था वो पल मानो बीत गए।
भंवरों की गुंजारो में फूलों की मुस्कानों में,
प्रेम का गीत लिखा होता था वो पल मानो बीत गए।
शुभ्र चांदनी रातों में महके-से मधुमासों में,
तुम बिन सब सूना होता था वो पल मानो बीत गए।
प्यार जहां पूजा होता था वो पल मानो बीत गए।
सब कुछ जहां दूजा होता था वो वह पल मानो बीत गए।
गीत कोई सुनाना चाहती हूं
गीत कोई सुनाना चाहती हूं,
मैं तुझको गुनगुनाना चाहती हूं।
तू तो मुझमें शामिल है खुशबू बनकर,
अपनी सांसों में तुझको समाना चाहती हूं।
कब से चाहा है तुझे कुछ याद नहीं,
तू मीत है मेरा बताना चाहती हूं।
प्रेम में तेरे ऐसे खोई हूं कि,
सावन में मोती लुटाना चाहती हूं।
झूम कर तेरे संग-संग मैं तो,
तुझको तुझसे चुराना चाहती हूं।
खोई रहती हूँ ख्यालों में तेरे,
तुझको ख्वाबों में बसाना चाहती हूं।
बरसाती रातों में जुगनुओं की तरह,
जीवन को तेरे सजाना चाहती हूं।
प्यार के रंग चुरा कर तुझसे,
हथेली पे हिना सजाना चाहती हूँ।
सुमन शर्मा
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