Thursday, July 15, 2021

पाकीजा मोहब्बत

कविता


 

विषय-प्रेम

 पाकीजा मोहब्बत

ख्वाहिशें हैं तो संभालो इनको,

यूं इस तरह न पालो इनको।

दर्द भी है तो छुपा लो इसको,

लोग तो जख्म हरे करते हैं,

यूं नुमाइशों से बचा लो इसको।

हम दिल में प्यार छुपाए बैठे हैं,

कभी तुम भी तो हवा दो इसको।

माना कि अब हम हैं गैरों में शुमार

अपना होने का भरम पालो इसमें,

माना कि बहुत फासले हैं दरमियां अपने,

कहने को ही सही नज़दीकियां बना लो इसमें।

तुम तो बनते हो मसीहा सबके,

घर मेरा भी जला है बचा लो मुझको।

तनहाई में कहीं बेजा़र न हो जाएँ हम,

तुम भी तो कभी आकर संभालो मुझको।

मेरी मोहब्बत है पाकीजा मोहब्बत,

यूं सरे आम तो न उछालो इसको।

खफा हैं हम सितमगर तुझसे,

इतना तो हो कि तुम मना लो हमको।

चाहत का सिला चाहत ना हो लेकिन,

कुछ दूर तक तो हमकदम बना लो हमको।

 सुमन शर्मा

अजमेर

परिचय

 सुमन शर्मा, अजमेर।  शैक्षणिक योग्यता- हिंदी साहित्य व दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर, बी एड, एमजेएमसी।  अध्यवसाय व अनुभव - 16 वर्ष तक सक्रिय...