Tuesday, August 24, 2021

पिता की स्मृति में

 

मेरे पापा  

पापा आप थे तो नई उमंग से चहक उठती थी मैं, 

हर पल नई ऊर्जा से दमक उठती थी मैं। 

आज भी आपकी यादों से महकती हूं मैं, 

पर नहीं चहक पाती पहले जैसे चहकती थी मैं।

आपके होने पर रहती थी आंखों में चमक, 

आप थे तो बुलंद हौसलों की धनी थी मैं।

आपके होने पर रहता था मन में संतोष, 

चमक तो है आज भी पर हौसलों की कमी हो जैसे। 

आप थे तो कभी नहीं रहती थी मैं उदास, 

मन में रहती थी आस हर पल था विश्वास। 

आज भी बटोरती हूं साहस, मन चाहता है करना विश्वास। 

पर मन है बहुत उदास क्योंकि पापा आप नहीं हो पास। 

यह जान लिया है मैंने मेरी पूरी दुनिया थे आप, 

आप नहीं हो तो कुछ भी नहीं है अब खास। 

कमी नहीं है इरादों की पर आंखों में नमी है, 

पापा आपकी हर जगह जिंदगी में कमी है।

कैसे बयां करूं आप क्या-क्या थे मेरे लिए, 

लगता है अब खाली है हाथ कुछ भी नहीं मेरे पास। 

आ जाओ ना पापा यह दिल है बहुत उदास, 

अभी तक महके हुए हैं आपकी यादों के एहसास।

पिता एक उम्मीद होते हैं जो हर पल हमें राह दिखाते हैं। 

जीवन के अधियारों में रोशनी बन छा जाते हैं।

सुमन शर्मा, अजमेर

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परिचय

 सुमन शर्मा, अजमेर।  शैक्षणिक योग्यता- हिंदी साहित्य व दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर, बी एड, एमजेएमसी।  अध्यवसाय व अनुभव - 16 वर्ष तक सक्रिय...